ghuman nagar,mata bira rani ji mandir,patiala
mata bira rani mandir, h.no- 305 , gali no-3, ghuman nagar , patiala .punjab
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bira rani baba ji

माता बीरा रानी जी मंदिर घुमन नगर -बी , गली नंबर - ३, पटियाला अलीपुर अराइयाँ रोड. माता बीरा रानी जी का यह मंदिर हर धरम और मजहब के लोगो की सेवा में दिन रात कार्य कर रहा है. माता जी का व्यक्तित्व बहुत सम्मानित और गौरवशाली सेवा भाव वाला है.आप का जनम भटिंडा में पिता मिस्त्री दल सिंह अव माता शरबती जी के घर में हुआ. 2 साल की आयु में ही आप पटियाला आ गए.7 सालकी उम्र से ही आप बाबा रोड़े शाह जी की प्रसिद्ध मज़ार पर सेवा भाव से जाने लगे.और बचपन से ही पूरी तरा से इश्वरिये भक्ति में लीन रहने लगे,पहने हुए कपड़ों से ही बाबा के स्थान पे पोछा लगाना और वही कपड़े पहन कर मस्त रहना.दिन भर बाबा के मज़ार पर बीतने लगा तो घर वालो को चिंता होने लगी. इश्वरिये भक्ति में लीनता बढ़ती गई और समय व्यतीत होता चला गया.17 साल की आयु में आप की शादी श्री सतबीर जी से हो गई. सतबीर जी भी बहुत धार्मिक प्रविर्ती के सज्जन हैं.उनके प्रोत्साहन से आप ने भक्ति मारग नहीं छोड़ा.इश्वरिये देन से आप के घर तीन औलाद हुई. सबसे बड़े बेटे जतिंदर सिंह, उनसे छोटे श्री मुकेश कुमार,और बेटी पूनम के जनम के बाद भी दिन रात आप प्रभु भगति में प्रसन्ता से लीन रहते. पति श्री सतबीर जी मुन्सिपल कारपोरेशन में सेवारत है और सभी बचे भी शादीशुदा सुखी जीवन जी रहे है. 7 साल की आयु से ही आप ने मांग कर खाना और मांग कर पहनने के नियम की पलना की है जो की आज भी कायम है. आज भी भगत द्वारा अर्पित वस्तर और भोजन ही ग्रहण करती है हरेक वीरवार और इतवार को माता जी के दरबार में चौकी लगती है जहाँ देश विदेश से संगतें अपनी मुरादें पूरी करने आती है.सुबह सवेरे से शाम तक भगत जनों का ताँता लगा रहता है .अष्टमी का त्यौहार , शिवरात्रि , और गुग्गा पीर जी के त्यौहार विशेष रूप से यहाँ मनाये जाते है. माता जी दहेज़ लेने और देने के विरुद्ध है, और आने वाली सांगतो को भी इस कुरीति को छोड़ने के बारे में जागृत कर रही है.माता जी के अनुसार यह बारे पाप है और भ्रूण हत्या महापाप है. बेटा या बेटी ईश्वर की देन है. .माता जी के अनुसार प्रेमश्वर के हुकम से ही हमें मानवता का चोला मिल पाया है. और सिर्फ इसी चोले में हम प्रभु भक्ति, भजन बंदगी, संगत सेवा, माता पिता और समाज सेवा कर सकते है. यह प्रभु द्वारा दी गई बेशकीमती वस्तु है जिस का कोई भी मूल्य नहीं है.लेकिन मनुष्य जनम हमें अपने पिछले सद कर्मो के अनुसार मिल पता है.यदि हम इस जीवन में कुछ अच्छा कर पाये तो जीवन सफल नहीं तो चुरासी योनियों में भटकते रहना पड़ता है.हमारी यही अरदास है की सभी भगत जन इस कीमती दात से लाभ ले सके और अपना जनम सफल कर पाये.सन्देश -------- मेरा सारी संगत को यही सन्देश है की यहाँ सेवा भावना से आये तो आपकी हर मनोकामना पूरी होगी और संसार का हर सुख आप को प्रपात होगा .

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