hamirpur,shri shanidev mandir ,himachal
श्री शनिदेव देव मंदिर हमीरपुर (स्वर्ग आश्रम)
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shri shani ji

यह मंदिर हमीरपुर से सुजानपुर वाया चलोखर मलाणा की सड़क पर स्तिथ है
. यह मंदिर सड़क से मातर 100 मीटर की दूरी पर स्तिथ है.यह मंदिर200 मीटर ऊंचे टिल्ले पर स्तिथ है. इस मंदिर के प्रांगण में आम के पेड़ है जो की फलो से लदे हुए है.मंदिर के प्रांगण में चील के पेड़ मंदिर को चार चाँद लगा रहे है.माता की मूर्ति लगभग 1000/- साल पुरानी है,१शुरु में यह मूर्ती एक गर्ने के पेड़ के नीचे विराजमान थी .स्थानीय लोग इसे कुलय मान कर इसकी पूजा करते है.लगभग ४०-५० साल पहले इस मंदिर का निर्माण पंडित रोशन लाल शर्मा व पंडित हरी लाल शर्मा टिब्बी के सहयोग से किया गया.लोग बचो की शादी के उपरान्त दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद दिलवाने अपने सगे सम्बन्धियों समेत बाजे गाजे के साथ आते है.
माता सभी की मनोकामना पूर्ण करती है.लगभग १० साल पहले स्थानीय लोगो कसहयोग से माता अम्बिका की संगेमरमर की मूर्ती राजस्थान के जिला जयपुर से मंगवा कर स्थापना की गई है.
मंदिर के प्रांगण में बहुत बड़ा हाल बनवाया गया है जिसमे लगभग ४०० आदमी बैठ सकते है.चेतर नवरात्र में माता के दरबार में विद्वान पंडितो द्वारा भगवत कथा का आयोजन किया जाता है.दसवी के दिन यहाँ विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है.अष्टमी के दिन अक्टूबर नवंबर के नवरात्रों में माता का जागरण किया जाता है.दूसरे दिन जलेबी का भंडारा किया जाता है.माता के मंदिर के साथ २ मंजिला संत निवास का निर्माण किया गया है.यहाँ मंदिर में ५ साल से बाबा जी का अखंड धूना और जयति जल रही है .माता अम्बिका मंदिर में हनुमान जी ,भैरव जी ,की मूर्तियों की स्थापना की गई है.
दूसरी तरफ एक और टिल्ले पर शनि देव जी का मंदिर बनाया गया है.इस मंदिर की स्थापना २३ जून २०१२ को स्तनिये निवासियों और भक्तो द्वारा की गई.हर महीने के ज्येष्ठ शनिवार के दिन मंदिर में लंगर भंडारा का आयोजन किया जाता है.माता और शनि जी की किरपा से भक्तो की मनोकामना पूरी हो रही है.मंदिर के पास के गावों के नाम टिब्बी,नारेली.भाटी,चलोखर,डलवाना,आदि है.सभी देव मूर्तियों की स्थापना डलवाना हमीरपुर के प्रसिद्ध ज्योत्षी विद्वान श्री पंडित सुभाष शर्मा द्वारा की गई है.शनि मंदिर का स्थापना दिवस हर साल २३ जून को मनाया जाता है
२२ जून की रात माता का जागरण और २३ जून को भंडारा होता है.शनि मंदिर पुरातन मंदिर शैली के अनुसार बनाया गया है जिसकी चादर तीन चरणो में डाली गई है.शनि महाराज भगतो पर विशेष किरपा कर सभी मनोकामना पूर्ण करते है.माता अम्बिका मंदिर का पुनर्निर्माण का काम चल हुआ है.अब यह मंदिर विशाल रूप लेने जा रहा है.मंदिर में स्टोर रूम और रसोई कक्ष ४० साल पहले से बना हुआ है.यहाँ भगत जान चूल्हा जल कर भोजन बनाते है.१५/२० साल पहले पानी की बहुत समस्या थी.मंदिर के निर्माण कलिए पानी १ किलो मीटर की दूरी से लाना परता था. सरकार द्वारा यहाँ पानी का नल प्रदान किया गया और भगतो द्वारा पाइप लगा कर पानी पहुँचाया गया लकिन गर्मी में पानी की समस्या रहती थी,सरवकल्याणकारी संस्था हमीरपुर के पर्यटनों द्वारा हैंडपंप लगवाया गया,माता और शनि जी की किरपा से बहुत ऊंचे टाइल पर काफी मात्र में पानी निकला जिससे पानी की समस्या हल हो गई.एक भगत द्वारा मनोकामना पूरी होने पर ५००००/-की राशि गुपत दान में दी गई जिससे हैंडपंप की जगह सबमर्सिबल लगवाया गया है.
मंदिर की पूजा पाठ का काम महंत दीपक गिरी जी महाराज और पंडित रोशन लाल शर्मा द्वारा दिन रात किया जा रहा है एक सोलर लाइट जोगिन्दर ठाकुर जिला परिषद सदस्य दवरा लगवाई गई है,जो की रात को मंदिर की शोभा बढ़ाती है
५०/६०साल पहले अम्बिका माता की पुरातन मूर्ति जो की गर्ने के पेड़ के नीचे विराजमान थी उसी समय घुमारवन गाओं का विचितर सिह ठाकुर नामक माता का भगत था जो की माँ में बड़ी आस्था रखता था,वह शादी ब्याह में बर्तन धोने का काम करता था,और उसी पैसो से माँ का भंडारा और जागरण करता था.यह उसी की प्रेरणा का परिणाम है की गाओं के युवक दिन रात माता के मंदिर में सेवा करते है और मासिक भंडारा करवाते है.
माता के मंदिर के प्रांगण में एक कमरे का निर्माण भी किया गया है जिसका नाम स्वरगआश्रम रखा गया है.इस का उद्धघाटन श्री श्री १००८ स्वामी महेशानन्द वरिन्दावन के कर कमलो द्वारा २९ मार्च १९८७ को रखा गया है.
मंदिर से पूर्व दिशा की और हिमालय परबत का मनोरम दृश्य दिखाई देता है मंदिर से एक और कुल्लू की पहाड़ों और एक और धोलाधार की पहाड़ी नज़र आती है,वही यहाँ से जोगिन्दरनगर धोलाधार की पहाड़ी नज़र आती है

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