Sadhu Surjit Singh ji hasanpur
Sadhu Surjit Singh ji, village- hasanpur,c/o-
Phone : 9888773800


sadhu surjit singh

पटियाला से सात किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है गाओं हसनपुर,सरहद रोड पर वेरका मिल्क प्लांट से यहाँ पर बहुत आसानी से बस या ऑटो द्वारा पहुंचा जा सकता है.इसी गाओं में साधु सुरजीत सिंह जी निवास करते हैं जिनकी आयु इस समय 80 साल की है.आप की जीवन यात्रा बहुत ही विचित्र और भगति भाव से भरी हुई है. आप का जनम भवानीगढ़ रोड पर स्तिथ गाओं जाहलान में माता ईशर कौर और पिता केहर सिंह जी के घर पर हुआ. बचपन में ही माँ पिता जी का साया सर से उठ गया. आप के भगति मारग पर जाने की कहानी बचपन में पांच साल की आयु से ही शुरू होती है. आप का जनम जिमींदार परिवार में हुआ.बहुत जमीन जायदाद वाला घर था.घर के आँगन के साथ ही सिद्ध संत बाबा मोनी जी की समाधि थी.जिनके बारे में प्रचलित है की संत जी जिन्दा समधीलीन हुए है.आज भी गाओं वासी बाबा जी को साक्षात हाजर नाजर और तत्काल ही परिणाम दिखा देने वाला मानते है.बाबा जी के स्थान की कुछ इंच हिस्सा आप के परिवार के निवास वाली जगह में आ गया तो बहुत ही चमत्कारी ढंग से बन रही दिवार बार बार गिर जाती. जब बहुत बार पर्यटन करने पर भी दिवार गिरने से नहीं रुकी तो काम करने वाले लोग इसे इश्वरिये प्रकोप मान कर डरते हुए काम छोड़ गए.क्युकी हर रोज़ दिवार उसारी जाती और रोज़ ही देखते ही देखते दिवार गिर जाया करती. तभी किसी सिद्ध पुरुष ने परिवार को बताया की आप की दिवार के नीचे संत बाबा मोनी ज के स्थान का हिस्सा आ रहा है. तो उस जगह को छोड़ने पर ही दिवार की उसारी पूरी हो पाई. तब साधु सुरजीत सिंह जी की आयु मातर पांच साल थी.तब से आप को बाल अवस्था में ही संतों के दर्शन होने शुरू हुए.जवान होते ही 17 फ़ौज में भर्ती हो गई, आप ने पाकिस्तान से हुई दो लड़ाइयां भी लड़ी और फिर बांग्लादेश जंग में भी हिस्सा लिया. फिर आप नौकरी से पेंशन आ गए लकिन आपने फ़ौज से कभी भी कोई पैसा या तनख्वा नहीं ली.आप ने अपने खेत जमीन जायदाद सब छोड़ कर केवल प्रभु को पाने की लालसा में भगति करते हुए बिता दिए. होशीआरपुर के पास उच्ची बस्सी नमक स्थान पर महाराजा भूपा द्वारा एक पूजा कुण्ड बनवाया गया जहा पर महात्मा सोम नाथ जी रहते थे यही पर राजा के हवन यज्ञ आदि होते थे.यह बड़ा ही निजं स्थान था .कोई गाओं वासी भी कभी कभी ही वह ऊँची पहाड़ी तक जाया करता था,आप जब वह गए तो बस वही ईश्वर भगति में लीन हो गए. 20 साल वही पर बीत गए. कभी कोई फल आदि मिलते तो खा लेते. आप ने ख्वाजा जी और संत मोनी जी की भगति की.आप ने गुग्गा जहर वीर और गुरु गोरख नाथ जी का भी वर्षों तप किया.20 साल बाद फिर दस साल बाबा बालक नाथ जी के स्थान के पास डूंघी तलाई स्थान पर 10 साल भगति में बिता दिए. होशीआरपुर शहर पर नौगजा पीर के स्थान पर दो साल बिताये.फिर एक साल दोराहा शहर में रायपुर चौधरी की मजार पर बिता दिया. .फिर वह से पटियाला के गाओं बारां में 5 साल तप करते हुए बिता दिए, अब पिछले कुछ महीनो से आप रतन सिंह जी के घर हसनपुर में बिराजमान है.

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