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Sant Baba Amreek Singh Ji

श्री गुरुद्वारा साहिब संगतपुरा भोरा साहिब गाओं बोहरपुर जनहेरिया डाकखाना ख़ास पटियाला जिले में एक विशेष स्थान रखने वाला गुरुधाम है.पटियाला बस स्टैंड से काउंटर नो-5 से बस लेकर इस स्थान तक पहुंचा जा सकता है. यह स्थान पटियाला से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है.सरहिंद रोड पर गाओं बारन से भी इस गाओं तक पहुंचा जा सकता है.
इस गुरुद्वारा साहिब का इतिहास बहुत महत्व रखता है क्युकी इस स्थान पर बहुत सारे महापुरषो के चरण पड़े है.इस स्थान के मुख्य सेवादार श्री संत बाबा अमरीक सिंह जी का जीवन और उद्देश्य बहुत ही धार्मिक और महान है, आप का जनम 17-5-1967 में माता श्री सम्पूर्ण कौर और पिता श्री खजान सिंह जी के घर इसी गाओं में हुआ.आप के माता पिता रूरेवाल वाले संतबाबा बलवंत सिंह जी महाराज को मानते थे और आप को लेकर उन के दर्शन हेतु जाया करते थे.तभी दैवी किरपा से संत जी ने आप के माता पिता से आप को भगति मारग पर लाने के लिए प्रेरित किया और आज्ञा करी की बालक को उनके डेरे पर छोड़ दिया जाये.आप के माता पिता ने गुरु आज्ञा का पालन किया, आप के माता जी पाकिस्तान से आये थे और गुरबानी का ज्ञान रखते थे,आप की विद्या संत बाबा इंदरजीत सिंह जी दमदमी टकसाल वाले संत जी द्वारा हुई,
संत बाबा जसवंत सिंह जी के साथ बचपन में अपने ही गाओं में धार्मिक दीवान में कीर्तन किया तो इलाका निवासी आप के कीर्तन से माँतरमुगध हो गए और संत जी से आप को गाओं में वापस आने की प्राथना की. संगतों की ही मांग पर गुरुद्वारा साहिब बनाने का काम शुरू हुआ. 1993 में माता परसन कौर जी ने गुरुद्वारा साहिब के निर्माण हेतु भूमि दान दी.और यहाँ पर ईमारत का काम शुरू हुआ.फकीरी और संत मत का रास्ता आप को संत बाबा जी हंसाली वालो ने दिखाया, इस स्थान पर 1996 में पूर्ण संत बाबा अजित सिंह जी हंसाली वाले महापुरुषों चरण पड़े और उनके मुख से यह वचन हुए कि किसी समय यहाँ बहुत बड़ा गुरुस्थान बनेगा और जो भी कोई इस स्थान से कोई मनोकामना मांगेगा तो वह पूरी हुआ करेगी.आज से आप हमारे हैं और हम आप के.आज हंसाली कि गुरुगद्दी पर संत बाबा परमजीत सिंह जी सेवा कर रहे है. उन्होंने हर रविवार हंसाली में दीवान लगाने कि आज्ञा कि और फिर हर वीरवार को भी दीवान सजाने का हुकम हुआ .आज तक हर रविवार और वीरवार को दीवान सजाये जाते है जहाँ पर देश विदेश से संगतें पहुँचती है
संत बाबा अमरीक सिंह जी ने अपने जीवन का उपयोग बचपन से आज़ तक केवल लोक कल्याण हेतु ही किया है. आप को बहुत सारे महापुरषों की संगत करने का सौभाग्य मिला है. आप ने अपने जीवन का मिशन सर्व धरम विश्व शांति बताया है. आप के मत अनुसार सत्संग बहुत ही दुर्लभ और अमूल्य है.हमें अधिक से अधिक प्रभु नाम का सिमरन और सत्संग करना चाहिए. महात्मा परमात्मा स्वरूप होते है,उनके जीवन का अनुसरण करना चाहिए.
बहुत सरे स्वार्थी लोग धरम के नाम पर लोगों को बाँट रहे है.आज़ के युग की सबसे बड़ी जरूरत है की नफरत का बीज खत्म करने की. धरम कोई पहरावा नहीं धरम तो जीवन जीने की कला का नाम है. शब्द गुरु के साथ अपनी सुरति एक हो जानी चाहिए.सभी धर्म परमात्मा से मिलने की राह दिखाते है लकिन मंज़िल एक ही है.पर या परमात्मा का कोई भी पारावार नहीं.परमात्मा का आज़ तक न कोई अंत पा सका है और न ही पा सकेगा .उंच अपार बेअंत स्वामी कवन जाने गुर तेरे यह वाक्य पूरी तरह सत्य हैं, आप जाने माने गुरबानी प्रचारक है और जन कल्याण हेतु अनेक समागमों द्वारा प्रभु का उपदेश संगतो तक पहुंचा रहे है.
आप ने अनगिनत प्राणियों को अमृत संचार द्वारा परमात्मा से जोड़ा है.
पूरनमासी को विशेष दीवान सजाये जाते है.दिन को 12 से 4 बजे तक दूर दूर से आई संगत गुरबानी का लाभ उठाती है.संत महाराज ईशर सिंह जी की याद में प्रोग्राम और दीवान सजाये जाते हैं.और हर धार्मिक पर्व पर संगत इस दरबार पर मुह मांगी मुरादें पाने के लिए आती है. यहाँ पर संत जी संगत के सहयोग से बहुत बारे गुरुद्वारा साहिब का निर्माण कारवां की इचा रखते है. संगतो से विशेष अनुरोध है की अपनी नेक कमाई से इस गुरुधाम की सेवका हेतु अधिक से अधि दान राशि दान देकर गुरु महाराज की खुशिया प्राप्त करे.

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