baba kohlu bhagat mandir,kurli gaddi,punjab
baba kohlu bhagat mandir,village- sitarpur (kartarpur),teh- dera bassi,distt- mohali,punjab
Phone : 9888773800


sukhdev singh bhagat

गुग्गा जाहर वीर जी को मानने वाले करोड़ो भगत है. और उनके लाखों मंदिर है.गुग्गा जी के भगतों में सबसे पहले भगत होने का श्रेय कोलू भगत जी को जाता है.गाओं सीतारपुर जिसे करतारपुर नाम से भी जाना जाता है जिलाः मोहाली का लगभग 1000 लोगों की आबादी वाला क्षेतर है.पहले यहाँ पर जंगल हुआ करता था. इस जगह पर मंदिर बाबा कोलू जी द्वारा बनाया गया. पौराणिक कथा और बजुर्गों के अनुसार कोलू जी सबसे पहले भगत थे जिन्हे गुग्गा जी ने साक्षात दर्शन दिए और इस मंदिर को खुद तयार करवाया था.कथा अनुसार कोलू जी गुग्गा जी को असीम श्रद्धा से मानने वाले भगत थे.इस स्थान पर जंगल में गाये चराते हुए गुग्गा जी ने साक्षात उनको अपने नीले घोड़े समेत दर्शन दिए और उनसे यहाँ पर अपने लिए एक छोटा सा दरबार बनाने की आज्ञा भी दी.कहा जाता है की गुग्गा जी ने बाबा कोलू जी को गुपत खजाना भी दिया और हुकम दिया की इस जगह पर मेरा दरबार बनाने के लिए ही जरूरत अनुसार वह धन खर्च किया जाये,अगर उस धन को किसी लालच वस खर्चने की कोशिश की गई तो धन राख में बदल जायेगा, लेकिन कोलू भगत ने उस समय बैल गाडी ,और अन्य वस्तुए खरीद ली.और समय बीतता गया.एक दिन गुग्गा जी के मन में इछा पैदा हुई की जा कर अपने अस्थान को देखा जाये.गुग्गा जी आधी रात के समय कोलू जी के घर पहुंचे और दरवाजा खटखटाया तो कोलू जी डर गए की नीले घोड़े का सवार बाबा तो आ गया है लेकिन मैंने उसके कहे अनुसार उसका दरबार तो बनवाया नहीं.जब गुग्गा जी ने दरबार के बारे में पूछा तो भगत कोलू को युक्ति सूझी और उस ने गुग्गा जी को कहा की आप यह आज्ञा तो दे गए थे की मेरा दरबार बना देना लेकिन किस जगह पर बनाना है यह बात तो बताई ही नहीं.तब गुग्गा जी उसे जंगल में इस जगह पर लाये और इस तरह यह दरबार भगत कोलू ने बनवाया. कहा जाता है की कोलू भगत से मिलने गुग्गा जी अक्सर आते रहते थे और उनके साथ बैठ चोप्पड़ भी खेलते.यह भी कहा जाता है की गुग्गा जी भगत कोलू को दरबार की सफाई करने पर सिक्का भी दिया करते थे,भगत कोलू जी पर गुग्गा जी की बहुत किरपा थी.गुग्गा जी के वर अनुसार जो भगत इस जगह सच्चे मन से आएगा उसके दुःख जरूर कट जायेंगे.जो भगत दूर देश राजस्थान गुग्गा मेड़ी के दर्शन करने न जा सके वह यहाँ पर गुग्गा जी की मन्नत पूरी कर सकेंगे .कोलू जी नियमत इस दरबार में सेवा करते रहे.बाबा कोलू जी गाओं कुरली में रहा करते थे और पास ही के जंगल में गुग्गा जी का यह दरबार था.आज भी इस गाओं में भगत जी के रिश्तेदार रहते है.समय बीतता गया और समय के साथ ही यहाँ मेला लग्न शुरू हुआ. धीरे धीरे सांगत इतनी ज्यादा हो गई की दरबार छोटा पड़ने लगा तो सेवादारों ने गुग्गा जी से प्राथना करके पास गाओं में बड़ा स्थान बनाने की आज्ञा ले ली ता की संगत को सुविधा हो सके क्युकी अब जंगल की जगह बस्ती और घने घर बन चुके थे.यहाँ से भगत इकठे होकर बागड़ यात्रा किया करते थे.और गुग्गा जी का झंडा चढ़ाया करते थे.

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