lakh daata peer, jafarpur, patiala
lakh daata peer,vill- jafarpur, p/o- balbhera, distt-patiala ,punjab
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rajinder singh

पटियाला से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है गाओं जाफरपुर, तकरीबन 1000 लोगों की आबादी वाला यह स्थान धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है.इस गाओं में लालां वाले पीर जी का बहुत ही सुन्दर और अध्भुत दरबार बना हुआ है. इस जगह पर आने के लिए पटियाला बस स्टैंड से बस मिल जाती है.पीर जी का ऐसा स्थान इलाके भर में बहुत प्रसिद्ध है. यहाँ पर राजिंदर सिंह जी मुख्या सेवादार के रूप में अपनी सेवा निभा रहे हैं. इस स्थान पर आप का परिवार कई पीढ़ियों से सेवा कर रहा है. राजिंदर जी शेख परिवार से सम्बन्ध रखते है.आप के पुरखे रावलपिंडी पाकिस्तान में लोक नायक दुल्ला भट्टी के भाई की संतान हैं.आप का जनम बाबा चनन जी और माता भागवन्ती के घर 10 /9 /1967 को हुआ.आप इस गाओं में आर .ऍम पी डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं.गाओं में राशन डिपू भी चला रहे हैं.आप दो बेटों खुशदीप भट्टी और करनदीप भट्टी के पिता हैं.और साथ ही इलाके भर में एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में आप का बहुत सम्मान है.पिता जी के दिहांत के बाद आप विरासत में मिली गद्दी की सेवा निभा रहे हैं.
पीर जी का यह स्थान बहुत ही पुरातन है.यह कितना पुराना है इस बारे में कोई भी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है.पहले छोटी ईंटों से बना हुआ स्थान था जहाँ पर आप के बज़ुरग सेवा और चिराग जलाया करते थे.पीर जी की अखंड जोत इस स्थान पर बरसों से जली आ रही है.वर्ष 2008 में इस नई ईमारत की सेवा करवाई गई.यहाँ पर लालां वाले पीर जी का स्थान और पीर बाबा हैदर शेख मलेरकोटला वालों का स्थान बना हुआ है.माता मैदान वाली,भैरों जी ,लखदाता पीर के बेटे मिआं राणा जी,और आपके पुरखों के स्थान भी बने हुए हैं.काली माँ और भैरों जी की मूर्तियों के साथ ही. पीर जी की घोड़े पर सवार बहुत ही सुन्दर मूर्ती भी बनी हुई है.इस जगह पर आने वाले लोग मन में एक अद्भुत शांति का अहसास पते हैं.पीर जी के दरबार पी कभी ताला नहीं लगाया जाता. रात दिन दरबार खुला रहता है.सुबह तीन बजे से कई भगत इस दरबार पर नतमस्तक होने आ जाते हैं.साल में दो भंडारे होते हैं. एक नए साल वाले दिन और दूसरा ज्येष्ठ महीने में जो की पीर जी का जनम का महीना है. भंडारे में दूर दूर से सांगत आती है. लंगर के इलावा ष्बील भी लगाई जाती है.आस पास के धार्मिक स्थानो पर सेवा कर रहे भगत और साधु सन्यासी इस उर्स में शामिल होते हैं. गाओं के सारे धार्मिक स्थानो पर चादर चढाई जाती है ,गुरुद्वारा साहिब में रुमालै की सेवा की जाती है और अंत में पीर बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाने की रसम अदा की जाती है,यहाँ पर आने वाले बहुत से बेऔलाद लोगों को औलाद सुख मिला है,और बहुत सारे लोगों ने अपने दुखों से मुक्ति पायी है.
राजिंदर सिंह जी का व्यक्तित्व बहुत है मिलनसार है.आप तन मन से इस स्थान की और आई हुई संगत की सेवा के लिए सदा हि प्रयतनशील रहते हैं. नशे को आप इस युग में बहुत बड़ी समस्या और कुरीति मानते है क्युकी नशा इंसान से उसके सोचने समझने की शक्ति खत्म कर देता है.आज कल फैशन के नाम पर छोटे होते जा रहे कपडे भी बहुत बड़ी लानत है. आप के मत अनुसार माँ बाप का सबसे पहला फ़रज़ अपने बच्चों को सही संस्कार देना है.

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