Shri shiv mandir motipuri,nabha
Shri shiv mandir motipuri, bhains gate,nabha.punjab
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shri pareshtar mahadev

नाभा शहर पंजाब का बहुत ही पुराना और धार्मिक महत्व रखने वाला शहर है. नाभा रयासत बहुत प्रसिद्ध रयासत रही है. पुराने नाभा शहर को पुरानी नाभि नाम से जाना जाता है.महाराजा हीरा सिंह ने नाभा शहर की स्थापना की .यहाँ से भारत की राजधानी दिल्ली और पाकिस्तान की राजधानी लाहौर दोनों पूरे 272 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ हैं.इस लिए इस स्थान को हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की नाभि माना जाता है. इसी नाम से इस शहर को नाम मिला नाभा. नाभा बस स्टैंड से 2 किलोमीटर की दूरी पर श्री शिव मंदिर श्री मोतीपुरी स्थापित है.वर्ष 1831 का अक्षय तीस के पवन दिवस पर इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था. नाभा राज घराने के महाराज रिपुदमन द्वारा दान की गई जमीन पर राजा हीरा सिंह द्वारा इसे स्थापित किया गया था.कहा जाता है की जब महाराजा ने इस स्थान पर तप करने वाले महंत मोतीपुरी की महिमा सुनी तो उनके मन में महंत जी और शिव शंकर के स्थान के दर्शन करने की इच्छा पैदा हुई. कहा जाता है की जब महाराजा ने इस जगह पर पाओं रखा तो उन्हें हर जगह मोती ही मोती बिखरे हुए दिखाई पड़े.तभी से इस मंदिर को शिव मंदिर मोतीपुरी नाम मिला. मंदिर के नाम 50 बीघा जमीन थी.मंदिर कमेटी बनने से पहले महंतों द्वारा बहुत बड़ा हिस्सा लीज़ पर दे दिया गया था.1992 में मंदिर कमेटी बनी और सेठ मुन्ना लाल जी जी ने इसका नेत्तृत्व किया.पहले मंदिर भवन बहुत छोटा और पुराना था. समय बदला और मंदिर कलश आस पास की इमारतों से बहुत नीचा हो गया. इस बात को ध्यान में रखते हुए 61 फुट ऊँचे मंदिर गुम्बंद की स्थापना की गई.पंडित गोबिंद राम जी शास्त्री इस मंदिर की सेवा और पूजा पाठ का काम देखते हैं..मंदिर कमेटी प्रधान श्री बरिश भान बांसल जी बहुत धार्मिक प्रविर्ती के सज्जन पुरुष हैं.आप एक अनुभवी और कामयाब बिजनेसमैन हैं.आप की सेवा भावना और उन्नत सोच के कारन आपके नेतृत्व में सारे ही कमेटी मेंबर बहुत ही तन मन से मंदिर व्यवस्था और सेवा कर रहें है.इस मंदिर कमेटी के सारे ही मेंबर मंदिर की व्यवस्था को बेहतर करने के निरंतर प्रयास करते रहते हैं. इन्ही प्रयासों का नतीजा है की आज इस मंदिर की प्रगति बहुत ही अछे तरीके से हो पा रही है.2004 में शिव प्रतिमा की स्थापना की गई जिस की सेवा लाला अमरनाथ जी बसंत जी द्वारा करवाई गई.राम दरबार की सेवा लाला जगन्नाथ जी द्वारा और राधा कृष्ण जी के स्वरूप की सेवा केदार बंसल जी द्वारा की गई.माता शेरांवाली मंदिर जैन कुमार जैन जी द्वारा बनवाया गया.पारे का शिवलिंग इस मंदिर की विशेष विशेषता है.2014 में श्री बरिश भान बंसल द्वारा अपने माता पिता की याद में इसकी सेवा करवाई गई. महा शिवरात्रि का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है. फ्रूट चाट .दूध का लंगर लगता है.जनम अष्टमी को झांकिया निकाली जाती हैं.नवरात्रों में माँ शेरांवाली की स्तुति की जाती है.एक घंटा विधि विधान से पूजा होती है और निरंतर गुलाब के फूल अर्पित किये जाते हैं.सावन में शिव महिमा पाठ पूरे विधि विधान से किया जाता है. यहाँ साधु संतों के ठहरने के लिए 6 कमरे बने हुए हैं.मंदिर में नित प्रति दिन कोई न कोई धार्मिक आयोजन होता ही रहता है.ऐसे आयोजनो के लिए मंदिर में विशेष रूप से बहुत ही आधुनिक ए.सी हाल बनाया गया है.और मंदिर में तीन हाल और भी हैं. यह सारी व्य्वस्था बिलकुल निशुलक प्रदान की जाती है. भगत गण अपनी श्रद्धा अनुसार जो भी दान राशि देते है उसका बहुत ही सुन्दर रूप से उपयोग किया जाता है.श्री लक्ष्मी नारायण जी मंदिर सरपरस्त हैं.कैशियर किरण कुमार जिंदल.सेक्टरी पृथ्वी चंद गर्ग ,चेयरमैन श्री अशोक बंसल,और श्री केवल कृष्ण जी के अथक प्रयासों के कारन ही इस अति धार्मिक स्थल की उन्नति संभव हो पा रही है. इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.यहाँ पर आ कर भोले नाथ जी की विशेष किरपा का अनुभव होता है.और महंत मोतीपुरी जी की तपोभूमि होने के कारन सारे इलाका निवासी यहाँ नतमस्तक होते हैं.मंदिर में दान देने हेतु मंदिर कमेटी से सम्पर्क किया जा सकता है.

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