dera mata beer sati ji, shahpur,
dera mata beer sati ji, village-shahpur, teh- bhadson. distt- patiala,punjab
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baba balram dass

पटियाला से भादसों जाने वाली सड़क पर गाओं टोहड़ा से आधा किलोमीटर की दूरी पर शाहपुर गावँ में डेरा माता बीर सती जी स्तिथ है.सरकारी सीनियर सकेंडरी स्कूल टोहड़ा के बिलकुल साथ बने इस मंदिर का इतिहास लघभग 700 साल से भी पुराना है.कैथल के गावँ मतोढ़ में रहने वाले माता मोहन बल जी के नाम पर इस स्थान को बीर सती माता नाम मिला.
पुरातन कथा अनुसार शाहपुर के एक ज्ञानी पंडित जी कैथल के गावँ मतोढ़ माता जी के दर्शन हेतु गए और उनकी निशानी के तौर पर उस गावँ से पांच ईंटे साथ ले आये,शाहपुर में पहुँचने पर इस स्थान पर आते ही पंडित जी विश्राम हेतु रुक गए.यहाँ पर बहुत ही अध्भुत ढंग से पांचो ईंटे इस जमीन में ही भसम हो गई.आज इसी स्थान पर डेरा बना हुआ है.और ईंटो के भसम होने के कारन ही उन ईंटों को माता जी का सती सवरूप मान कर गाओं के निवासियों ने इस डेरे को माता बीर सती जी नाम दिया.
इसी डेरे मैं पानी की वयवस्था हेतु गावँ वालों ने मिल कर एक बाउली खोदने की विचार बनाया और जस जगह को उपयुकत जाना वहां पर बरगद का एक पेड था.गाओं वालों ने खुदाई के लिए उस पेड को काटना चाहा तो पेड से आवाज़ आई की तुम मुझे मत काटो मै स्वयं ही अपनी जगह बदल लूँगा और कहा जाता है की जब अगले दिन लोगों ने देखा तो पेड सचमुच दूसरी जगह पर था.यह पेड आज भी इसी डेरे के परांगन में मौजूद है.और बाउली की जगह सरोवर बना हुआ है.यहाँ पर बाबा ब्रह्म दास तपसवी ने सेवा की और घोर तप किया उनका मंदिर भी इसी डेरे में है.यहाँ पर माँ की अखंड ज्योति जल रही है.हर साल 23 मार्च को सलाना भंडारा मनाया जाता है.और उसी दिन खूनदान कैंप भी लगाया जाता है.हर महीने की द्वादशी को खीर का लंगर होता है.आस पास के गाओं वाले गाये और भैंसो का दूध पहले बाबा जी को अर्पित करते हैं. नवदम्पति जोड़े भी अपना शादी शुदा जीवन शुरू करने से पहले माता जी का आशीर्वाद लेने हेतु आते हैं,यहाँ पर आये हुए साधु संतों और यात्रियों के ठहरने और लंगर का 24 घंटे प्रबंध है.इस स्थान पर बाबा बरयाम दास जी ने 25 साल सेवा की थी और उनके बाद बाबा बलराम दास जी वर्ष 2001 से आज तक इस स्थान की सेवा कर रहे हैं.
पिछले बारह साल से निरंतर हर महीने द्वादशी को पंडित ओमकार ( माझी वाले ),सतपाल गिरी ( नलास ),सुखदेव राम ( लढ़ा ),और महंत राजनाथ ( रांघेलं कलां )जिलाः फतेहगढ़ वाले धार्मिक कथा का गायन करके संगतों को निहाल करते हैं. इस डेरे को किसी भी तरह का दान आदि देने हेतु ऊपर दिए गए नंबर पर सम्पर्क किया जा सकता है.

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