pracheen shiv mandir,heera mahal, nabha
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pandit gopal krishan vashliyal

महाराजा हीरा सिंह ने नाभा शहर की स्थापना की .यहाँ से भारत की राजधानी दिल्ली और पाकिस्तान की राजधानी लाहौर दोनों पूरे 272 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ हैं.इस लिए इस स्थान को हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की नाभि माना जाता है. इसी नाम से इस शहर को नाम मिला नाभा. यह पंजाब का बहुत ही पुराना और धार्मिक महत्व रखने वाला शहर है. नाभा रयासत बहुत प्रसिद्ध रयासत रही है. पुराने नाभा शहर को पुरानी नाभि नाम से जाना जाता है.नाभा बस स्टैंड से एक किलोमीटर की दूरी पर प्राचीन श्री शिव मंदिर हीरा महल नाभा स्तिथ है. इस मंदिर का इतिहास महाराजा काल से सम्बंधित है. महाराजा हीरा सिंह जी ,महाराजा परताप सिंह जी द्वारा यहाँ पर पुरातन शिव मंदिर मई स्थापना की गई थी.

.मंदिर कमेटी प्रधान परमजीत वर्मा एडवोकेट जी बहुत धार्मिक प्रविर्ती के सज्जन पुरुष हैं. उनके नेतृत्व में सारे ही कमेटी मेंबर बहुत ही तन मन से मंदिर व्यवस्था और सेवा कर रहें है.प्राचीन श्री शिव मंदिर हीरा महल नाभा की मैनेजिंग कमेटी इस मंदिर की देखरेख बहुत ही अच्छे तरीके से कर रही है. जिसमें श्री परमजीत वर्मा एडवोकेट परधान ,श्री विनय गुप्ता उप परधान ,श्री आर एस धीमान उप परधान , श्री नरेश कुमार शर्मा केशियर ,श्री संजय ढींगरा ओर्गनइजिंग सेक्रेटरी ,श्री हरबंस लाल शर्मा , श्री सुशील शर्मा , श्री सुभाष गुप्ता आदि बहुत ही अच्छे ढंग से मंदिर की सेवा कर रहें हैं, मंदिर सरपरस्तों में श्री अमन गुप्ता, चन्दर गुप्ता, प्रेम बंसल, जीवन गुप्ता , बंसराज भारद्वाज, वी ,पी , शुक्ला जी सभी मंदिर कार्यकम और व्यवस्था में विशेष रूप से सेवा और दान करतें हैं.

इस मंदिर प्रांगण में श्री हनुमान मंदिर, कीर्तन भवन, श्री राधा कृष्ण, राम दरबार, माता शेरांवाली जी का दरबार सुशोभित है. 12-12-2011 को माँ संतोषी जी, श्री शनिदेव जी, भैरों जी की मूर्तियां राजस्थान से ला कर प्रतिष्ठित की गई थी, इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष मूर्ती स्थापना दिवस ,शिवरात्रि, रामनवमी,जन्माष्टमी, दीपावली को विशेष पूजा अर्चना और भंडारा होता है. हर शनिवार को श्री शनि देव जी का भंडारा किया जाता है. 10/10/1989 को विशाल धर्मशाला का निर्माण किया गया था , जिसमें सभी धार्मिक कार्यक्रम और अनुष्ठान किये जाते हैं, मंदिर प्रांगण में काफी खुला मैदान है,जहाँ पर लंगर आदि की व्यवस्था हेतु रसोई घर बना हुआ है.
मंदिर सुबह पांच बजे से रात नौ बजे तक खुला रहता है. प्रत्येक सोमवार यहाँ पर विशेष कथा कीर्तन किया जाता है. इस मंदिर की विधिवत पूजा हेतु पंडित गोपाल कृष्ण वसलीयाल, जी वर्ष 2007 से निरंतर इस मंदिर को सेवायें दे रहें हैं. आप एक उच कोटि के करम कांडी पंडित है और हर पर्कार की विशेष पूजा, पाठ, हवन, ज्योतिष आदि के लिए आप से सम्पर्क किया जा सकता है.आप के पिता स्वर्गीय पंडित श्री परमानन्द वाश्लियाल जी ने लगभग बाईस साल मंदिर की सेवा की है. आप का जनम गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ, आप का संपर्क नंबर 98557-83725 है.
इस मंदिर में श्री परशुराम जी की मूर्ती स्थापना की जा रही है, भगत जानो से अनुरोध है की वह बढ़ चढ़ कर सहयोग राशि भेजने की किरपा करें, मंदिर में दान देने हेतु केनरा बैंक के निमिनलिखित खता नंबर [ 2119101001978 , I.F.S.C CODE- CNRB0002119, MICR CODE- 147015152 में अपनी दान राशि जमा करवाई जा सकती है. और दिए गए नम्बरों पर भी सम्पर्क किया जा सकता है.इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

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