Alipur Araian,Gugga Rana Mandir, Patiala
Gugga Rana Mandir, Alipur Araian, Patiala, Punjab, India
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Mahant Amarjeet Singh Ji

ये प्रसिद्ध मंदिर पटियाला शहर के अलीपुर अराईयाँ में स्थित है। इस मंदिर के स्थापित होने की कथा इतिहास बड़ा ही रोचक और आश्चर्यचकित कर देने वाला है। गद्दीनशीन महंत अमरजीत सिंह जी की उम्र उस समय केवल 12 वर्ष की थी जहाँ से इस मंदिर का इतिहास शुरू होता है। 12 वर्ष की उम्र में एक दिन बालक अमरजीत सिंह जी को सांप ने काट लिया और बालक मूर्छित हो गया। तभी इनके पिता श्री तुलसी राणा जी को ईश्वरीय हुक्म हुआ कि बालक के प्राण तभी बच सकते है अगर बालक गुग्गा जी की शरण में जाये और उनका भक्त बने। उसी समय पिता जी इनको गावं बारन, पटियाला स्थित गुग्गा माढी में सेवा के लिए छोड़ आये। वहां पर बालक हर रोज मंदिर की सेवा संभाल करने लगा।

एक दिन बालक अमरजीत सिंह को आकाशवाणी हुई कि पटियाला के अलीपुर अराईयाँ में गुग्गा जी का एक मंदिर/डेरा बनवाया जाए। जो जगह मंदिर के लिए निश्चित की गई थी वहां पर उस समय पुरानी बारीक ईटों का एक चबूतरा और आक की झाड़ियाँ थी। बालक अमरजीत सिंह ने गावं की पंचायत से गुग्गा दरबार के लिए प्रार्थना की और गुग्गा जी के हुक्म के बारे में बताया और वे अपने गावं की पंचायत को ले कर गुग्गा जी के मुख्य दरबार बागड़ पहुंचे। बागड़ से आप मंदिर स्थापना के लिए दो ईंटें लाए और मंदिर स्थापना का कार्य शुरू हुआ।

पिता श्री तुलसी राणा जी ने ईंटों के जोड़े की स्थापना की और घर पहुँचते ही इस नश्वर संसार को अलविदा कह गए। इस सदमे के पंद्रह दिनों के भीतर ही आपकी माता जी भी आपको बेसहारा छोड़ कर सवर्ग सिधार गए। पर आपने जाहर वीर गुग्गा जी की कृपा से धैर्य नहीं खोया और अपने पिता जी के अधूरे सपने को पूरा करने का कृत संकलप लिया। बालक ने धैर्य रखा और निर्माण कार्य में लगा रहा। गावं लोगों तथा बहुत से और श्रद्धालुओं ने कार सेवा की जो निरंतर आज तक चल रही है। जगह की हालत बहुत ही दयनीय थी। जगह-जगह बड़े-बड़े खड्डे थे। परन्तु हर तरह की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद और आपकी निरंतर मेहनत और संगत की अथक मेहनत प्रयास स्वरुप इस मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।

आपको बागड़ के महंत श्री अनारकली जी ने आशीर्वाद दे कर महंत की उपाधि से अलंकृत किया। इस प्रकार से बालक अमरजीत सिंह महंत अमरजीत सिंह जी बन गए। बागड़ में जिस स्थान पर माता बाछल जी से दूध का कटोरा गिर गया था वहां से महंत जी मिटटी ले कर आये और प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को एक-एक चुटकी देते। इस मिटटी मात्र से ही लोगों के दुख-दर्द दूर होने लगे।

आप जी ने फिर कठोर तप किया और तीन-तीन चालीसे किये। आप जी ने चालीस-चालीस दिन जमीन के अंदर (भोरें में), पानी में तथा श्मशान भूमि में कठोर तप किया। इस प्रकार आपको गुग्गा जी की असीम कृपा प्राप्त हुई। जाहर वीर गुग्गा जी की असीम कृपा से आप ने भक्तों का मार्गदर्शन किया और निरंतर कर रहे हैं।

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